सिर आँखों पर बैठाना मुहावरे का अर्थ है sir aankhon par baithna muhavare ka arth – बहुत आदर सत्कार करना ।
दोस्तो जब कोई व्यक्ति किसी ऐसे स्थान पर पहुंच जाता है की वहां पर जाने के बाद उसकी इज्जत बन जाए और लोग जब भी उसके बारे मे कुछ कहे तो वे अच्छा ही कहे । इसी तरह से जब कोई व्यक्ति कोई अच्छा कार्य कर देता है तो उसकी भी एक इज्जत हो जाती है । और जब वह जहां भी जाता है तो लोग उसे इज्जत देते है या बहुत आदर सत्कार देते है । इस तरह से जब कोई किसी का आदर सत्कार करने लग जाते है तो सिर आंखो पर बैठाना कहा जाता है ।

सिर आँखों पर बैठाना मुहावरे का वाक्य मे प्रयोग Use in sentence
- घर में आए मेहमान को हर कोई सिर आंखो पर बैठाता है ।
- अच्छे लोगो को तो हर कोई सिर आंखो पर बैठाने को तैयार है ।
- गाव का लडका जब से सरपंच बना है तब से गाव के लोग उसे सिर आंखो पर बैठाने लगे है ।
- अगर बेवकूफ भी अच्छा अधिकारी होता है तो लोग उसे भी सिर आंखो पर बैठाने को तैयार है ।
- कलेक्टर बन जाने के कारण प्रसांत को गाव के लोग सिर आंखो पर बैठाने लगे है ।
- जब से इसकी नोकरी लगी है तब से गाव के लोग इसे सिर आंखो पर बैठाते है ।
- अगर एक बार मैं सरकारी नोकरी लग गया तो लोग भी मुझे सिर आंखो पर बैठाने लगेगे ।
- जब से महेश को खजाना मिला है तब से लोग उसे सिर आंखो पर बैठाने लगे है ।
सिर आंखो पर बैठाना मुहावरे पर कहानी Idiom story
किसी समय की बात है किसी गाव मे महेश नाम का एक लडका रहता था । उसके घर मे उसके पिता और माता रहा करती थी । महेश के पिता बहुत ही गरीब थे फिर भी उन्होने महेश को पढने के लिए भेज दिया था । महेश के पिता गरीब होने के कारण जब भी वे कही जाते तो लोग उन्हे सही नाम से भी नही बुलाते थे और जब वे किसी के घर जाते तो वहां लोग उन्हे जमीन पर ही बैठने को कह देते थे ।
इस तरह से करने के कारण से महेश के पिता को बहुत बुरा लगता था पर वे कर भी क्या सकते थे । उन्हे यह भी पता था की किस कारण से उनके साथ लोग इस तरह से कर रहे है । इसी कारण से उसके पिता ने महेश को पढाने के बारे मे सोचा था । ताकी वह बडा होकर नोकरी लग जाएगा तो कम से कम लोग हमारे साथ ऐसा तो नही करेगे ।
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जब महेश छोटा था तब से उसके पिता उसे समझते की बेटा तुम्हे नोकरी लगना है । और इस तरह से समझाते हुए इसे पढाया करते थे । धिरे धिरे समय के साथ महेश पढ लिख कर बडा हो गया था । तब महेश अपने दिन मे अपने पिता को काम कराता और रात को पढाई करता था ताकी वह नोकरी लग जाए ।
इस तरह से करने के कारण महेश को कभी भी किसी चिज की जरूरत होती तो वह अपनी कमाई से लेकर आ जाता था । महेश को भी पता था की अगर मैं नोकरी लग गया तो लोग मुझे भी आदर देने लग जाएगे । क्योकी जब भी महेश अपने घर से बाहर निकलता तो लोग महेश से कहते की हमारे गाव मे बडे बडे नोकरी नही लग पाए ओर यह लग जाएगा ।
इस तरह से महेश को कहने के कारण एक दिन महेश ने ठान लिया और उस दिन के बाद महेश दिन रात एक कर कर पढाई करने लगा था । इस तरह से पढाई करते हुए उसे एक वर्ष बित गया था और तभी लोगो को पता चला की जो भी लडके पढे लिखे है उनके लिए रेलवे ने नोकरी देने का अलान किया है ।
जिसमे लडको को पेपर देना होगा और फिर मेरिट के आधार पर बच्चो को नोकरी मिलेगी । साथ ही जिन लडको के ज्यादा नम्बर बनेगे उन्हे अच्छी नोकरी मिलगी । साथ ही यह भी दिया था की 10 दिनो के बाद मे नोकरी का पेपर है । धिरे धिरे 9 दिन बित गए तब जाकर महेश को इस बारे मे पता चला था । क्योकी उसने पढाई की थी इस कारण से वह भी 11 वे दिन पेपर देने के लिए चला गया था ।
जब वह पेपर देने के लिए जा रहा था तब लोग उससे कह रहे थे की देखो ये जा रहे नोकरी लेने के लिए और साथ ही न जाने और क्या क्या कह रहे थे । तब महेश ने अपने आप को उनकी बात सुनने से रोका और पेपर देकर आ गया था । पेपर लगने के 15 दिनो के बाद पेपर का रिजल्ट आ गया की किसके कितने नम्बर बने है और किसको कोनसी नोकरी मिलेगी ।
तब महेश के गाव के लोग भी अपने आस पास के लडको का रिजल्ट देख रहे थे । उस समय अखबारो मे रिजल्ट आता था इस कारण से गाव के सभी लडके जिन्हाने पेपर दिया था वे सब एक ही स्थिान पर और एक ही अखबार मे रिजल्ट देख रहे थे । जब महेश ने वहां बैठे आदमियो से कहा की मेरा भी रिजल्ट देखना ।
तब उन आदमियों ने कहा की तुम्हारा नम्बर नही आया है । तब महेश ने कहा की आप देख कर तो बता दो । पर उन लोगो ने महेश की एक भी नही सुनी । धिरे धिरे सभी लडको का रिजल्ट देख लिया था पर महेश का अभी भी देखना बाकी था । इस कारण से वह वहां पर खडा होकर उन लोगो को देखने के लिए कह रहा था ।
तब एक आदमी ने सोचा की इसका रिजल्ट देखने मे हमारा क्या जाता है यह कब से खडा होकर हमे कह रहा है जरा देख देता हूं । ऐसा सोचकर उसने जब महेश का रिजल्ट देखा तो उसे पता चला की महेश के तो 90 नम्बर आए है और यह पूरे राज्य मे प्रथम आया है । साथ ही यह भी दिया था की यह बहुत ही अच्छी पोस्ट पर नोकरी लगेगा ।
यह देखकर उस आदमी को विश्वास नही हुआ और उसने फिर से उसका रिजेल्ट देखा । तब उसने अपने आस पास बैठे लोगो से भी इस बारे मे कहा तो लोगो को विश्वास नही हुआ की यह प्रथम आया है । जब सब लोगो को पता चल गया तब उनमे से एक आदमी ने महेश को भी इस बारे मे बाता दिया था ।
तब उस दिन जब भी महेश कही से जाता तो लोग उसे कुछ नही कहते और उसके साथ अच्छी तरह से बाते करने लग जाते थे । जब वह नोकरी लग गया तो लोग उसे इतना आदर देने लगे की जब वह किसी के घर चला जाता तो लोग उसे सिर आंखो पर बैठाने लगते थे ।

समय के साथ महेश के पिता अब अमीर हो गए थे और जब भी वे कही पर जाते तो लोग उन्हे अपने साथ बैठाने लगे थे । तब एक दिन कुछ लोगो ने महेश से कहा की तुम्हारी नोकरी क्या लग गई तुम्हे तो हर कोई सिर आंखो पर बैठाने लगा है ।
तब महेश ने कहा की यह तो नोकरी का ही कमाल है वरना कोई भी मुझसे सही तरह से बोलता भी नही था । इस तरह से फिर महेश अपनी नोकरी करता और अपने आप मे मस्त रहता था । इस तरह से आप लोगो को इस कहानी से समझ मे आ गया होगा की इस मुहावरे का अर्थ बहुत आदर सत्कार करना होता है ।
सिर आँखों पर बैठाना मुहावरे पर निबंध || sir aankhon par baithna essay on idioms in Hindi
दोस्तो sir aankhon par baithna एक मुहावरा है और इसका मतलब यह नही है की आप किसी व्यक्ति को अपने सिर पर बैठाने लग जाओ । बल्की इसका मतलब यह है की आप किसी का बहुत आदर सत्कार कर रहे हो ।
क्योकी उपर जो कुछ हमने आपको बताया है जैसे की sir aankhon par baithna मुहावरे को समझाया है और कहानी बताई है तो दोनो ही स्थान पर यह साफ बताया गया है की सका अर्थ क्या है ।
तो इसका मतलब यह हुआ की जहां पर इस मुहावरे के अर्थ की बात होती है यानि बहुत आदर सत्कार करने की बात होती है वही पर इसका वाक्य में प्रयोग हो सकता है ।
जैसे की मानो की राहुल है तो उसने अपने दादा का बहुत आदर सत्कार किया । तो इसे हम ऐसे भी कह सकते है की राहुल ने अपने दादाजी को सिर आंखो पर बैठाया और इसी तरह से इस मुहावरे का वाक्य में प्रयोग होगा ।
तो आप अब यह समझ गए होगे की इसका अर्थ क्या है और वाक्य कैसे होगे ।
sir aankhon par baithna muhavare ka arth – बहुत आदर सत्कार करना ।
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