मीन-मेख करना मुहावरे का अर्थ meen mekh karna muhavare ka arth – छिद्रान्वेषण करना ।
दोस्तो मीन शब्द का अर्थ मछली से होता है और वही पर मेख का मतलब कांटे से होता है मगर मुहावरे के रूप में मीन -मेख शब्द का साथ में उपयोग कर लेने के कारण से इसका अर्थ बदल जाता है ।
अब मीन मेख करना मुहावरा उस अर्थ को दर्शाता है जब मानव किसी तरह से छिद्रान्वेषण करता है। जैसे की हमारे धर्म के शास्त्र है और उनमें जो कुछ लिखा गया है उसका मतलब है की हमे वह मानना है । मगर हम क्या करते है की उनके अंदर दोष निकालते रहते है या कह सकते है की उनका छिद्रान्वेषण करते रहते है । तो यह जो छिद्रान्वेषण करना शब्द है असल में वही मीन मेख करना मुहावरे का सही अर्थ है।

मीन मेख करना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग || meen mekh karna use of idioms in sentences in Hindi
1. हिंदू धर्म मे शास्त्रो में जो लिखा गया है उसे हिंदू धर्म के लोगो को मानना चाहिए क्योकी शास्त्रो में मीन मेख करना धर्म के लोगो के लिए उचित नही है ।
2. पुराणो में जो कुछ लिखा गया है उसे मान लेना चाहिए उनमें मीन मेख करना अच्छी बात नही है ।
3. अरे मुर्ख होते है वे लोग जो अपने ही धर्म के ग्रंथो में मीन मेख करते रहते है ।
4. आज बहुत से लोग पुराणो में जो लिखा है उसमें मीन मेख करते रहते है जो की अच्छा नही है ।
5. लोगो को शार्मा जी की अच्छाईया नही दिखती है बल्की उनमें मीन मेख करते है ।
6. इस किताब में जो कुछ लिखा गया है वह पूरी तरह से सत्य है इसमें मीन मेख करना सही नही है ।
7. अरे भाई क्योकी हिंदू पूराण में मीन मेख करने की कोशिश कर रहे हो जो कुछ लिखा है उसे मान लो ।
8. तुमको कुछ पता तो है नही और जो ऋषि मुनी शास्त्रो में लिख कर गए है उनमे मीन मेख करते हो ।
मीन मेख करना मुहावरे पर कहानी || meen mekh karna story on idiom in Hindi
दोस्तो एक बार की बात है एक संत हुआ करते थे जो की महा ज्ञानी थे और अपने इसी ज्ञान के कारण से वे जाने जाते थे । जो संत थे वे अपने ज्ञान के कारण से दूर दूर तक जाने जाते थे इस कारण से बहुत सी बार जब संत किसी प्रोग्राम का आयोजन करते थे जिसमें कथा को सुनाया जाता था तो दूर दूर से गाव के लोग आ जाते थे ।
वे एक बड़े शहर में रहते थे जहां पर उनका एक बड़ा मठ था और इस मठ में सभी तरह की सुख सुविधा थी और जो कोई ज्ञान ग्रहण करने के लिए कथा सुनने के लिए आता था उसे मठ में सब कुछ फ्री में दिया जाता था ।
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उसे फ्रि में भोजन करवाया जाता था और भोजन भी सादी रोटी सब्जी नही बल्की अच्छी क्वाल्टी का देसी घी से बना भोजन करवाया जाता था और इसके बदले मेंलोगो से किसी तरह का धन नही लिया जाता था । हालाकी लोगो की इंच्छा होने पर वे स्वयं ही ईश्वर को धन भेट कर सकते थे ।
अब संत जो थे वे एक दिन एक कथा का आयोजन करते है जिसमें क्या होता है की आस पास के लोग आते है और इतना ही नही बल्की कुछ पत्रकार भी आ जाते है जो की संत जी का इंट्रव्यू लेने के लिए आए थे । जब सभी लोग आ जाते है तो संत जी कथा का आयोजन शुरू करते है और लोगो को अच्छा ज्ञान देते है और अच्छी अच्छी बाते बताते है ।

मगर कथा के अंदर में पत्रकारो ने संत जी से कुछ प्रशन पूछना चाहा । तब संत जी ने भी इजाजत दे दी थी । इस कारण से पत्रकारो ने प्रशन शुरू किए और अब प्रशन पूछते पूछते वे इस बात पर आ जाते है की हमारे शास्त्रो में क्या क्या लिखा गया है और इस बारे में संत जी भी उत्तर देते हुए बता देते है की हमारे शास्त्रो में बहुत कुछ लिखा गया है ।
जिसके बारे में आपको एक साथ नही बताया जाता है । अब उन ही पत्रकारो में से एक पत्रकार ऐसा था जो की भगवान में विश्वास नही करता था और उसका नाम सुधीरचंद था । अब सुधीरचंद ने थोड़ा बहुत शास्त्रो को पढा था और उसने केवल उन ही बातो को पढा था जो की समझ में आना कठिन होता है और उसने उन बातो का गलत मतलब निकाल लिया ।
और इसी बात के बारे में सुधिरचंद ने संत जी से प्रशन पूछना शुरू कर दिया और कहा की शास्त्रो में यह सब लिखा गया है जो की पूरी तरह से गलत है अब संत जी सुनते ही समझ गए की सुधिरचंद ने अर्थ का अनर्थ कर दिया है और इसे समझाने से कोई फायदा नही ।
तब संत ने एक ही बात कही की देखो सुधिरचंद जो कुछ शास्त्रो में लिखा है उसका अर्थ इतना आसान नही होता है बल्की उनका अर्थ काफी गहरा होता है जो की किसी आम आदमी के लिए समझना कठिन होता है ।
और हमेशा एक बात का ध्यान रखना चाहिए की जो हमारे महान ऋषि मुनी हुए है उनके पास एक अच्छा ज्ञान था और उन्होने ही इन शास्त्रो को लिखा है तो इसमें जो कुछ लिखा गया है उसे मान लेना चाहिए , न की उनमें मीन मेख किया जाए । संत ने कहा की शास्त्र हमारे धर्म मे महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले है और इनमे मीन मेख करना सही बात नही है ।
और यह सुन कर सभी लोगो ने संत की बता का समर्थन किया जिसके कारण से मजबुरन सुधिरचंद को चुप रहना पड़ गया था । इस तरह से दोस्तो जो कथा थी उसका भी समापन कर दिया गया था और इसके बाद में जो लोग थे वे अपने अपने घर चले जाने लगे ।
तो दोस्तो कहानी की तरह ही असल जीवन में बहुत से लोग है जो की सच में शास्त्रो में मीन मेख करते है जो की उचीत नही है ।
वैसे आप इस कहानी से मुहावरे के सही अर्थ को समझ गए होगे की मीन मेख करना मुहावरे का अर्थ छिद्रान्वेषण करना होता है ।
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