खोदा पहाड़ निकली चुहिया मुहावरे का अर्थ khoda pahad nikli chuhiya muhavare ka arth – अधिक परिश्रम करने पर भी लाभ कम प्राप्त होना ।
दोस्तो आज के समय मे जो लोग परिश्रम करते है उसे ही लाभ प्राप्त होता है । और वही अपने जीवन मे सफल हो सकता है । इसके विपरीत जो लोग परिश्रम कम करते है और लाभ अधिक पाने की इच्छा रखते है उन्हे अपने परिश्रम के हिसाब से ही कम लाभ मिलता है ।

पर कभी कभी कुछ कार्य ऐसे होते है जिसे करने मे मानव अपने शरीर का पुरा बल लगा देते है । यानि बहुत अधिक परिश्रम करते है फिर भी उन्हे अपनी मेहन्त या परिश्रम की तुलना मे लाभ नही मिलता । इस तरह से जब किसी भी कार्य मे परिश्रम बहुत अधिक किया जाए और लाभ कम प्राप्त हो तो इसे खोदा पहाड निकली चुहिया कहते है । क्योकी परिश्रम पहाड के खोदने जितना अधिक था और लाभ चुहिया जितना कम मिलता है ।
खोदा महाड़ निकली चुहिया का वाक्य मे प्रयोग khoda pahad nikli chuhiya ka vakya me prayog
- अपने बॉस की बात मान कर रामलाल दिन और रात काम करता पर जब उसे तनख्वाह मिली तो उसे हमेशा के जीतने ही पैसे मिले इसे कहते है खोदा महाड़ निकली चुहिया ।
- दसवी कक्षा मे 90 प्रतिशत बनाने के लिए सुनिल ने दिन रात एक कर दिया पर जब उसका पिरणाम आया तो वह मुश्किल से 50 प्रतिशत ही बना सका यही है खोदा पहाड निकली चुहिया ।
- सुरज ने पैसो की लालच मे सेठ के पास दिन रात काम किया पर सेठ ने उसे चन्द पैसे दकर जाने को कहा तब वह सोचने लगा की मेरे साथ तो खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली बात हो गई ।
- हरलाल ने अपने खेत मे दिन रात रहकर फसल की हिफाजत की पर जब फसल को निकाला गया तो वह बहुत कम हुई, यही होता है खोदा पहाड़ निकली चुहिया ।
- रामू ने अपने पिता की कई वर्षो तक सेवा की पर जब वे मरने लगे तो उन्होने अपनी आधी से ज्यादा जमीन अपने बडे बेटे के नाम कर दी और रामू को एक छोटा सा हिस्सा ही मिला , यही होता है खोदा महाड़ निकली चुहिया ।
खोदा पहाड़ निकली चुहिया पर कहानी khoda pahad nikli chuhiya par kahani
प्राचिन समय की बात है किसी नगर मे एक सेठ रहा करता था । सेठ के पास धन दोलत की कोई कमी नही थी । उसके पास बहुत हीरे जेवरात थे । जिसके बारे मे लोगो को पता था । सेठ बहुत ही कंजुस था वह अपना कुछ भी किसी को नही देता था ।
यहा तक की वह तो अपने घर के लोगो को भी हीरे जेवरात तक नही देता था । सेठ के घर मे उसकी पत्नी उसका बेटा रहा करता था । इस तरह से सेठ के घर मे कुल तिन ही सदस्य थे ।
सेठ का बेटा भी सोचता की अगर पिताजी हमे धन नही देते है तो इसमे है क्या उनके मरने पर यह मेरा ही होगा । इस तरह से वह सोचता रहता था । धिरे धिरे समय के साथ सेठ की मृत्यु हो गई ।
आप भला तो जग भला का मतलब और वाक्य व कहानी
ताना मारना का मतलब और वाक्य व कहानी
तार तार होना मुहावरे का मतलब और वाक्य व निबंध
दाहिना हाथ होना का मतलब और वाक्य में प्रयोग
दौड़ धूप करना का मतलब और वाक्य मे प्रयोग व कहानी
अपने पिता के मर जाने के कुछ दिनो के बाद मे उसके बेटे ने अपने सभी स्थानो को देखकर आ गया । पर उसे अपने पिता का धन नही मिला । क्योकी उसके पिता ने उसे कही छुपा दिया था और वह किसी को भी नही पता था ।
इस कारण से कई दिनो तक तो सेठ का बेटा उस धन को देखने मे लगा रहा । आखिर मे वह थक हार कर उसे छोड दिया । धिरे धिरे सेठ की पत्नी भी मर गई थी । पर उसने मरने से पहले अपने बेटे का विवाह कर दिया था ।
समय के साथ सेठ के बेटे का भी बेटा हो गया जिसका नाम रामलाल था । अब रामलाल के माता पिता उसकी अच्छी तरह से परवरिश करने लगे थे । जिसके कारण से वह देखने मे बहुत ही हट्ठा कट्ठा हो गया था ।
जब रामलाल बडा हुआ तो एक दिन रामलाल को अपने गाव के लोगो से सुनने को मिला की उकसे दादाजी बहुत ही अमीर थे । उनके पास बहुत धन दोलत थी साथ ही उनके पास हीरे जेवरातो से भरे बडे बडे कटोरे थे ।
यह सुन कर रामलाल को लगा की गाव के लोग किसी और की बात कर रह है । क्योकी अब रामलाल के पिता के पास एक घर और एक खेत के अलावा कुछ नही था । इस तरह की बात सुन कर रामलाल अपने घर गया ।
तब उसने अपने पिता से पूछा की पिताजी मेरे दादाजी क्या काम करते थे । यह बात सुन कर रामलाल के पिता ने कहा की आज तुम यह बात क्यो पूछ रहे हो । तब उसने कहा की मैंने सुना है की मेरे दादाजी के पास हीरे जेवरातो के बडे बडे कटोरे थे ।
यह सुन कर रामलाल के पिता ने कहा की बेटा तुम्हारे दादाजी के पास थे तो जरूर पर वे पता नही उनका क्या कर कर चले गए । यह सुन कर रामलाल ने कहा की तो फिर आपने हीरे जेवरातो को ढूंढने की कोशिश नही की ।
तब रामलाल के पिता ने कहा की मैंने तो बहुत कोशिश की पर मुझे कुछ नही मिले । साथ ही उन्होने यह भी कहा की वे मरने से पहले कह रहे थे की अपने पास जो खेत है उसे कभी मत बेचना । यह सुन कर रामलाल को लगा की जरूर दादाजी ने हीरे जेवरातो को खेत मे ही छीपाया होगा ।
इस तरह से फिर रामलाल को लालच आ गया । और अगले ही दिन वह खेत को जोतने का बहाना बनाने लगा और कहा की इस बार हम भी खेत मे फसल उगाएगे । क्योकी रामलाल के पिता कभी भी खेत नही जोतते थे । इस कारण से उन्होने कहा की बेटा तो फिर तुम ही काम करोगे ।
यह सुन कर रामलाल ने कहा की मैं अकेला ही अपने खेत को जोत दुगा । उस समय खेत को जोतने के लिए हाथो से कस्सी लेकर खेत जोता जाता था । इस कारण से रामलाल भी अगले दिन खेत जोतने का बहाना बना कर खेत मे कस्सी लेकर चला गया और खेत मे जगह जगह खड्डे खोदने लगा ।
यह सब आस पास के गाव के लोग देख कर सोच रहे थे की यह खेत जोत रहा है की अपने खेतो मे कुछ ढुंढ रहा है । तभी कुछ लोगो ने कहा की इसके दादा के पास जो हीरे जेवरात थे वही यह ढूंढ रहा है ।
इस तरह से फिर रामलाल दिन और रात अपने खेत मे ही रहता और अपने खेत को खोदता था । इस तरह से उसे अपने खेत को खोदते हुए एक महिना हो गया पर उसे वहां कुछ नही मिला । तभी उसके पिता को पता चल गया की रामलाल खेत को जोतता नही है बल्की वहा पर खजाना देखता है ।
यह जानकर रामलाल से उसके पिता ने कहा की बेटा उन्होने न जाने उन हीरे जेवरातो का क्या किया था । वह हमारे खेत मे नही मिल सकते है इस कारण से तुम अपने खेत को खोदना बंद कर दो ।
पर उसने अपने पिता की बात नही मानी और अपने खेत को खोदता रहा । इसी तरह से खेत को खेतदे हुए आखिर मे उसे एक पोटली मिली । पोटली मिल जाने के कारण से उसे लगा की जरूर इसमे दादाजी के छुपाए हुआ धन हो सकता है ।
इस कारण से उसने उस पोटली को खोला तो उसे एक सोने का हार मिल गया । यह देखकर रामलाल खुश भी हुआ और दुखी भी हुआ । क्योकी उसने अपने खेत को खोदने मे पूरे छ महिने लगा दिए ।
जो सोने के हार से उसकी मेहन्त का आधा भी लाभ उसे नही प्राप्त हुआ । क्योकी उस समय सोने की किमत बहुत ही कमी थी । इस तरह से फिर वह थक हार कर अपने घर जाने लगा । तब रास्ते मे लोग उसका मजाक बना रहे थे की इसने अपने खेत को खोद डाला और इसे कुछ नही मिला ।
जब वह अपने घर गया तो उसके पिता ने भी मजाक उडाते हुए कहा की क्या मिला खेत से । तब उसने कहा की एक सोने का हार । यह सुन कर रामलाल के पिता ने कहा की तुमने खेत को खोदने मे छ महिने लगा दिए और एक सोने का हार ही मिला है ।

इस तरह से कहते हुए उन्होने कहा की यह तो वही बात हो गई की खोदा पहाड निकली चुहिया । अब रामलाल निराश होकर अपने घर पडा रहा । पर जब वर्षा हुई तो लोगो ने उसे कहा की तुमने अपने खेत को तो खोद ही दिया है तो अब इसमे फसल भी उगा दो ।
लोगो की बात मान कर वह फसल उगाने लगा और इस तरह से फिर वह अपने खेत का काम करने लगा था । खेत को इस तरह से खोदने के कारण से उसमे अच्छी फसल पैदा हुई ।
जिसके कारण से फिर वह कहने लगा की भले ही मैंने हीरे जेवरातो की लालच मे अपने खेत को खोदने से खोदा पहाड निकली चुहिया वाली बात हो गई हो । पर इस कारण से मेरे खेत मे फसल अच्छी हो गई और मेरी महेन्त का फल मुझे दे दिया।
इस तरह से फिर रामलाल अपने खेत मे ही फसल उगाता और अपना जीवन चलाता । अब रही बात उस खजाने की तो वह उन्हे कभी भी नही मिला । इस तरह से आपको पता चल गया होगा की इस मुहावरे का अर्थ क्या है ।
खोदा पहाड़ निकली चुहिया मुहावरे पर निबंध || khoda pahad nikli chuhiya essay on idioms in Hindi
दोस्तो पहाड़ और चुहिया का एक पुराना रिश्ता होता है क्योकी अक्षर चुहे को एक सुरक्षित घर चाहिए होता है जो की पहाड़ होता है इस कारण से कुछ चुहिया पहाड़ के अंदर बिल बनाकर रहते है ।
मगर पहाड़ को खोदना अधिक परिश्रम वाला काम होता है और चुहिया का निकलना कम लाभ वाला होता है और यही कारण है की इस मुहावरे का अर्थ अधिक परिश्रम करने पर भी लाभ कम प्राप्त होना होता है जो की आपने उपर समझा है ।
तो अगर कोई अपने जीवन में कुछ ऐसा काम करता है जो की बहुत ही मेहनत का काम करता है जिसमें काफी परिश्रम करना पड़ता है मगर अंत में फल कम ही प्राप्त होता है तो वहा पर इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता हैऔर कहा जाता है की khoda pahad nikli chuhiya ।
निचे बेस्ट मुहावरो की लिंक है जो बहुत ही उपयोगी है ।
ख्याली पुलाव पकाना का अर्थ, वाक्य व कहानी
गले का हार होना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
आँच न आने देना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
कलेजा मुँह को आना का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
कलेजे पर साँप लोटना मुहावरे का अर्थ और वाक्य व कहानी
कलेजा ठंडा होना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
आ बैल मुझे मार का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
कान में तेल डालना का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
आँख मारना मुहावरे का अर्थ, वाक्य व कहानी
आम के आम गुठलियों के दाम का अर्थ, वाक्य व कहानी
आसमान पर चढ़ना का अर्थ व वाक्य मे प्रयोग
तिल का ताड़ बनाना का अर्थ और वाक्य व कहानी
दिमाग सातवें आसमान पर होना का अर्थ , वाक्य व कहानी
धोबी का कुत्ता घर का न घाट का, का अर्थ व वाक्य मे प्रयोग
टोपी उछालना का अर्थ, वाक्य व कहानी
आटे दाल का भाव मालूम होना का अर्थ, वाक्य व कहानी
जान पर खेलना का अर्थ व वाक्य मे प्रयोग
आसमान पर थूकना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
हाथ पाँव मारना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
भैंस के आगे बीन बजाना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
मिट्टी का माधो मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
कलेजे पर पत्थर रखना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
अंगद का पैर होना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रायोग
अंधे के हाथ बटेर लगना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
एक हाथ से ताली नहीं बजती मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
कच्चा चिट्ठा खोलना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
घड़ों पानी पड़ना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
कुत्ते की मौत मारना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग
चाँद पर थूकना मुहावरे का अर्थ और वाक्य मे प्रयोग