कमर सीधी करना मुहावरे का अर्थ kamar seedhi karna muhavare ka arth — थकान मिटाना या आराम करना ।
दोस्तो जब कोई व्यक्ति बहुत अधिक काम कर लेता है तो इससे क्या होता है की उसकी जो कमर होती है वह दर्द करने लग जाती है और इसी तरह से काम करने के कारण से कमर बाकी सी हो जाती है । खासकर किसान जो होते है उनके साथ इस तरह की बात बहुत अधिक होती है ।
क्योकी किसान जो होते है वे ज्यादातर निचे उपर होने का काम ही करते है । यानि शरीर को झुका कर ही काम करते है और इस तरह से काम करने के कारण से लंबे समय तक कमर बाकी रहती है तो ऐसे में कमर बाकी हो जाती है । और कमर दर्द भी करती है। तो इसे सिधा करने के लिए क्या होता है की जो काम के कारण से थकान हुई है उसे दूर करना होता है ।
मतलब थकान मिटानी होती है जिसके कारण से आराम से खटीया पर लेट लिया जाता है । तो इससे थकान मिट जाती है और यह कह सकते है की आराम हो जाता है । क्योकी इस तरह से करते हुए कमर को सीधा किया जाता है तो इस मुहावरे का अर्थ हुआ थकान मिटाना या आराम करना ।
class="wp-block-heading">कमर सीधी करना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग || kamar seedhi karnause of idioms in sentences in Hindi
1. दिन भर खेत में काम करने के कारण से आज बहुत थक गए है तो कमर सीधी करनी होगी ।
2. किसान खेत में काम कर कर घर आता है तो कहता है की अब जाकर समय मीला है जरा कमर सीधी कर ले ।
3. अभी तो इस तेज धूप में शहर से घर आए है पहले कमर सीधी कर ले फिर कोई काम करेगे ।
4. अभी फसल कटाई का समय आ रहा है तो दिन से रात्री तक काम करते रहते है और रात का भोजन करने के बाद ही कमर सीधी करते है ।
5. आज 20 दिन हो गए लगातार काम करते हुए कमर सीधी करने का मोका तक नही मिला ।
6. सेठजी आप तो काफी निर्दयी हो हम मजदुर सुबह से काम कर रहे है मगर कमर सीधी करने का मोका नही दे रहे हो ।
7. अभी अभी तीर्थ यात्रा से घर आए हो जारा कमर सीधी कर लो ।
8. बहन के विवाह में भाई को इतना काम करना पड़ता है की उसे कमर सीधी करने का भी मोका नही मिलता ।
कमर सीधी करना मुहावरे पर कहानी || kamar seedhi karna story on idiom in Hindi
दोस्तो एक छोटा सा और खुबसुरत गाव हुआ करता था जहां पर अनेक तरह के लोग रहते थे और वे जो लोग थे वे अपने खेत में तरह तरह की फसल को उगाने का काम करते थे और यही कारण था की गाव काफी हरा भरा नजर आता था जिसे जे भी देखता काफी खुबसूरत लगता था ।
और इसके पीछे गाव के लोगो की महनत थी । गाव के बहुत से लोग किसान थे जो की फसल को उगाने का काम करते थे और अपना पेट भी भरत थे और धन भी हासिल कर लेते थे ।
इसी तरह से उस गाव में रामानंद नाम का एक आदमी रहा करता था जो की पेशे से एक किसान था । रामानंद के पास खुब सारी जमीन थी करीब 20 एकड़ और रामानंद अपनी पूरी की पूरी जमीन में गेंहू की फसल को उगाता और इससे जो कुछ उसे प्राप्त होता था उसका उपयोग कर वह अपना पेट भरता और अपना घर चलाता था ।
रामानंद इस तर हसे किसान का काम कर कर खुश भी था और उसे बहुत अधिक फायदा भी मिल जाता था । मगर गेंहू की एक फसल तेयार करने के लिए किस तरह की कठिनाई का सामना करना पड़ता है यह कोई और नही बल्की रामानन्द ही जानता था ।
दरसल रामानन्द जो था वह हमेशा से अपने खेत में काम करता था । तो इसी तरह से एक बार की बात है रामानन्द ने अपने खेत में गेंहू की फसल उगा रखी थी जिसमें पानी देने के लिए उसे हमेशा खेत में तैयार रहना पड़ता था ।
खेत में एक कुवा था जो की लाईट की सहायता से चला करता था और कभी लाईट दिन को आती थी तो कभी रात के समय में लाईट आती थी इसी तरह से आने के कारण से रामानन्द को रात और दिन खेत में ही रहना पड़ता था मगर इस तरह से काम करने के कारण से रामानन्द की फसल जो थी वह अच्छी बन जाती थी ।
और इस बार भी उसकी फसल अच्छी थी और जल्द ही कटाई का समय आने वाला था तो पानी को भी तेजी से देना पड़ता था । तो रामानन्द लगा हुआ था अपने काम में । एक महिना बितने पर रामानन्द की सफल जो थी वह पक कर तैयार हो गई तो उसे काटना शुरू कर दिया ।
रामानन्द काफी मेहनती आदमी था । किसके कारण से किसी दूसरे आदमी की मदद न लेकर स्वयं ही काम करता था । मगर आपको भी पता है की 20 बीघा जमीन की खेती कनना कितना कठिन होता है ।
मगर रामानन्द मेहनती था जो की दिन रात खेत में काम करने के लिए लगा रहता था और कमर सीधी करने का भी समय नही लेता था । इसी तरह से रामानन्द ने इस बार भी अपनी फसल की कटाई शुरू कर दी ।
एक दिन तो वह कुछ धीमे काम करता रहा मगर दुसरे ही दिन सुबह 4 बजे लाईट का उपयोग कर कर गेंहू को काटना शुरू कर देता था और रात के 10 बजे तक इसी तरह से काम करता रहता था । और जब समय हो जाता था तो अपने घर जाकर स्नान करता और फिर भोजन कर कर अपनी पत्नी को कहता की अब कमर सीधी कर ले जरा ।
मगर पत्नी यह सुन कर कहती की अब तो निंद ही लेनी होगी कमर सीधी करने का तो आपके पास समय ही कहा पर है । तो इसी तरह से काम करने के कारण से रामानन्द ने अपनी फसल अकेले ही काट अली और फिर फसल से अन्न को अलग करवा लिया ।
जिसके कारणर से रामानन्द को काफी फायदा मिला । इसके बाद में जो कुछ बचता है उसे बेच दिया गया और गेंहू को अपने घर पर लेकर रख लिए और फिर अपनी पत्नी से कहता है आज कितने दिन हो गए आराम करने का समय तक नही मिला मगर आज से कमर सीधी करनी शुरू कर देते है ।
और इस तर हसे फिर रामानन्द लगातार तीन दिनो तक खटीया पर रह कर आराम करता था । इस तर हसे रामानन्द अकेला ही 20 बीघा खेत से अच्छा लाभ हासिल करता था ।
इस तर हसे काम करते रहने के कारण से रामानन्द को कमर सीधी करने का समय नही मिलता था । कहानी से समझ गए होगे की कमर सीधी करने का मतलब थकावट दूर करना या आराम करना होता है ।
मेरा नाम मोहम्मद जावेद खान है । और मैं हिंदी का अध्यापक हूं । मुझे हिंदी लिखना और पढ़ना बहुत अधिक पसंद है। यह ब्लॉग मैंने बनाया है। जिसके उपर मैं हिंदी मुहावरे की जानकारी को शैयर करता हूं।