दाद देना मुहावरे का अर्थ और वाक्य में प्रयोग daad dena muhavare ka arth

दाद देना मुहावरे का अर्थ daad dena muhavare ka arth – शाबासी देना या वाह वाह करना ।

दोस्तो जब कोई व्यक्ति किसी ऐसे कार्य को कर देता है जिसे महत्वपूर्ण और कठिन समझा जाता है । तो उस व्यक्ति के ऐसे करने पर सभी उसकी वाह वाह करते है । और उसे शाबासी भी देते है । जैसे विद्यार्थी कुछ अच्छा करता है तो शिक्षक उसे शाबासी ‌‌‌है । ठिक उसी तरह से अन्य कार्यो में साबासी दी जाती है । ‌‌‌इस तरह से जहां पर भी शाबासी देने की बात होती है या वाह वाह करने की बात होती है वही पर दाद देना कहा जाता है ।

दाद देना मुहावरे का अर्थ और वाक्य में प्रयोग daad dena muhavare ka arth

‌‌दाद देना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग

  • जब रामू ने दसवी कक्षा में प्रथम नम्बर लाया तो सभी उसे दाद देने लगे ।
  • हमारे देश के फोजी भाई ने अकेले ही 10 आंतकवादियो को मार गिराया जिसके कारण से देश के सभी लोग फोजी भाई की दाद देने लगे ।
  • किशोर ने जब आग मे फसे लोगो को बचा लिया तो सभी किशोर की दाद देने ‌‌‌लगे ।
  • ‌‌‌किशोर की शायरी सुन कर गाव के सभी लोग दाद देने लगे ।
  • जब कंचन ने अच्छा काम किया तो देश के लोग उसे दाद देने लगे ।
  • कन्हैयालाल की फिल्मो की लोग आज भी दाद देते है ।
  • ‌‌‌जब शहर में रामलिला का आयोजन हुआ तो सभी देखने लगे और कलाकारो को दाद देने लगे ।

दाद देना मुहावरे पर कहानी

प्राचीन समय की बात है किसी नगर में एक साधू रहा करता था । जो की अपने आस पास के छोटे बच्चो को शिक्षा देने का काम करता था । वह साधू बहुत ही ज्ञानी था और उसके जीतना ज्ञानी आस पास कोई नही था । ‌‌‌जिसके कारण से साधू के बारे में धिरे धिरे लोगो को पता चलने लगा तो सभी अपने बेटो को शिक्षा लेने के लिए साधू के पास भेजने लगे थे ।

और इस तरह से साधू के पास केवल निर्धन परिवार के लोग ही शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते थे । मगर जैसे जैसे समय बितता गया साधू का नाम चारो और फैलता जा रहा था और इसी ‌‌‌बात का नतिजा यह हुआ की साधू के पास धनवान लोगो के बेटे भी पढाई करने के लिए आते थे । मगर वे लोग धनवान थे जिसके कारण से साधू से कहने लगे की महाराज आप पैसे ले लोग मगर हामरे बेटे को किसी अच्छे स्थान पर ज्ञान दो ।

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जिसके लिए हम आपको एक महल जैसे आश्रम बनाकर देगे । मगर इस बात को सुन कर साधू उन ‌‌‌लोगो को पहले समझाते की चाहे जीतना भी धनवान क्यो न बन जाओ कभी भी अपने आप को बड़ा नही समझना चाहिए । और कभी भी निर्धन और अमीर का भेदभाव नही करना चाहिए । ‌‌‌मगर साधू की इस बात का ज्ञान किसी को भी समझ में नही आता था ।

सभी अपने आप को धनवान मानने में इतने अधिक महत्वपूर्ण समझते थे की वे अपने बेटो को कभी भी एक निर्धन परिवार के बेटो के साथ शिक्षा नही लेने देता था । दरसल निर्धन लोग जो होते थे उनके पास किसी तरह की कोई सूविधा नही थी । मगर इस बात का ‌‌‌नतिजा यह होता था की साधू के पास आश्रम में वे जमीन पर बैठ कर अध्ययन करते थे । मरग जो अमीर लोग के बेटे थे वे ऐसा नही करते थे । क्योकी वे एक धनवान घर से थे तो ऐसा नही करना पसंद करते थे ।

मरग साधू के जीतना ज्ञानी कोई नही था जिसके कारण से सभी को ऐसा करना पड़ा । ‌‌‌धिरे धिरे जैसे जैसे समय बितता गया तो साधू के पास बहुत से बच्चे पढाई करने के लिए आ गए थे । जब उन बच्चो की शिक्षा पूरी होती तो अंत में साधू शिक्षा का परिणाम निकालने के लिए बच्चो से परिक्षा भी लेता था ।

ताकी साधू को पता चलता की कोन बच्चा किनता अधिक ज्ञानी है । ‌‌‌मगर इसके अलावा भी साधू समय समय पर बच्चो की परिक्षा लेता रहता था । और इस लिए साधू अपने शिष्यो यानि बच्चो को जान के मुंह में भी धकेलने से पिछे नही हठता था । इसी तरह से साधू ‌‌‌को सभी बच्चो से एक परिक्षा लेता था और वह यह थी की पास ही एक जंगल हुआ करता था ।

जहा पर तरह तरह के जानवर रहते थे ‌‌‌जिनमे से ही एक शेर भी था । साधू अपने शिष्यो को इसी जंगल में अकेला लेजाकर छोड देता था और सभी के हाथ में एक ‌‌‌मानचित्र देता था । जिसके आधार पर सभी को जंगल पार करना था । और जो सबसे पहले जंगल को पार करता है उसे विजय बनाया जाता था साथ ही उसे उचित इनाम दिया जाता था ।

यह उचित इनाम बहादुरी का हुआ करता ‌‌‌था । इस तरह से एक बार की बात है साधू के पास अध्ययन करने के लिए गरिब घर से कुछ बच्चे थे और अमीर घर में से बहुत से बच्चे थे । कुल मिलाकर 11 बच्चे ऐसे थे जो की अंतिम कक्षा मे अध्ययन  कर रहे थे । अब उन्हे जंगल को पार करना था ‌‌‌।

इन बच्चो में से एक निर्धन परिवार का बच्चा था जिसका नाम किशोर था । उसका पिता नही था बल्की उसकी माता ही थी जो की लोगो के घरो में एक नोकरानी का काम करती थी । तब किशोर और उसके 10 साथी छात्रो को साधू ने जंगल में छोड दिया और साधू भी उनके पिछे पिछे जंगल में चला गया ।

जिसके साथ कुछ बहादूर ‌‌‌शिष्य थे जीनको युद्ध कला भी आती थी । साथ ही उन्होने भी इस तरह से कभी न कभी इस जंगल को पार किया था ‌‌‌उनको भी अपने साथ ले लिया । जब किशोर और उसके दस साथी को साधू ने बताया की इस जंगल को पार कर कर अंतिम लक्ष्य तक पहुंचना है । मगर यहां पर काफी सकंट होने वाले है ।

जिनमे से आपको शेर भी मिल सकता है और अन्य जानवर भी मिल ‌‌‌सकते है । यह सब सुन कर बच्चे डर गए । मगर किशोर न डरा और उसने कहा की गुरूदेव हम इस जंगल को पार कर लेगे ।इस तरह से फिर साधू वहां से चला गया और बच्चो से कहा की मैं आपको अंतिम लक्ष्य पर मिलने वाला हूं । मगर साधू असल में उन बच्चो के पिछे पिछे था । और साधू के साथ कुल 11 लोग और थे जो की बलशाली ‌‌‌थे ।

वे असल में एक भूत के वेश में जंगल में छिप गए थे और एक एक कर कर सभी बच्चो की हिफाजत करने के लिए उन पर ध्यान रखने लगे थे । धिरे धिरे समय बितता गया और बच्चे एक साथ आगे की और बढने लगे थे । आधे जंगल पर पहुंचने के बाद मे कुछ बच्चो ने देखा की उनका रास्ता ‌‌‌मानचित्र अलग अलग बता रहा है ।

यानि ‌‌‌साधू ने सभी बच्चो को अलग अलग ‌‌‌मानचित्र दिया था जिसे पार कर कर सभी को अंतिम स्थान पर पहुंचा था । जिसके कारण से सभी अलग अलग हो गए और अपने लक्ष्य की तरफ जाने लगे थे । ‌‌‌इस तरह से जो लोग भूत के ‌‌‌भैष मे थे वे ही उन बच्चो को डराने लगे । मगर बच्चे बहादूर बन कर आगे बढते जा रहे थे । कुछ दूर तय करने के बाद में बच्चो को तरह तरह की बाधा मिल रही थी जिसे पार करते हुए सभी आगे की और बढ रहे थे । ‌‌‌समय बितता जा रहा था मगर सभी बच्चो को अभी तक अंतिम लक्ष्य नही मिला था ।

कुछ दूर और चलने के बाद में उन बच्चो में से ‌‌‌किशोर को उसका ही एक साथी बच्चा ‌‌‌दिखाई दिया । जिसके कारण से ‌‌‌किशोर ने उसे आवाज लगाई । जिसे सुन कर केवल वही बच्चा नही बल्की दुसरा बच्चा भी उसे देखने लगा था । इस तरह से ‌‌‌किशोर और उसके ‌‌‌दो साथी जैसे जैसे आगे बढते उसके बाकी के साथी मिलते जा रहे थे ।

यह देख कर सभी ने अपना ‌‌‌मानचित्र मिलाया तो सभी ने देखा की यह तो ‌‌‌मानचित्र मे दिया है की हम एक स्थान पर मिलेगे । यह देख कर सभी ने सोचा की हमे पहले ही ‌‌‌मानचित्र ‌‌‌को मिला लेना चाहिए ताकी अगल अगल यहां तक नही पहुंचना ‌‌‌पडता ।  ‌‌‌इस तरह से सभी बच्चे आगे की और बढने लगे थे ।

कुछ दूर पर जाने के बाद में सभी को एक शेर दहाड़ सुनाई दी । यह सुन कर सभी डर गए । मगर सभी आगे बढते जा रहे थे और चारो और नजर रख रहे थे । तभी सभी ने देखा की उनके पिछे एक शेर आ रहा है। यह देख कर सभी डर गए । और वहां से भागने का प्रयास करने लगे । मगर यह देख ‌‌‌ ‌‌‌किशोर ने अपना दिमाग लगाया और सोचा की अगर हम सभी इसी तरह से भागते रहेगे तो शेर हम सभी को खत्म कर देगा ।

इससे अच्छा है की मैं सभी अपने साथी की जान बचा लू । इस तरह से सोच कर ‌‌‌किशोर ने अपने सभी साथियो को ‌‌‌भागने को कहा और कहा की मैं इस शेर को भटकाने का प्रयास करता हूं आप सभी भाग जाओ । मगर किसी ने ‌‌‌किशोर की बात नही मानी । क्योकी वे भी ‌‌‌किशोर को छोडना नही चाहते थे ।

दाद देना मुहावरे पर कहानी

मगर जब ‌‌‌किशोर बार बार यही कहता रहा तो सभी वहां से भाग गए और केवल ‌‌‌किशोर ही वहां पर बच पाया था । ‌‌‌तब ‌‌‌किशोर ने सबसे पहले अपने बचाव के लिए आस पास क्या है देखने लगा । तभी ‌‌‌किशोर को एक मजबूत पेड का टूटा हुआ ‌‌‌लकडा मिला था । और उसके आस पास कुछ पत्थर भी दिखे थे । ‌‌‌जिसके कारण से ‌‌‌किशोर ने उन पत्थरो को अपने हाथ में लिया और ‌‌‌लकडे को भी और फिर उस शेर की और फैकने लगा था ।

तभी शेर के भेष में से एक व्यक्ति निकाल और ‌‌‌किशोर से कहा की बच्चे जरा रूको । ‌‌‌यह देख कर ‌‌‌किशोर कुछ समझ नही पाया था । मगर फिर उस व्यक्ति ने ‌‌‌किशोर को बता दिया की यह तुम्हरे गुरू की परिक्षा का हिस्सा था । इस तरह से फिर ‌‌‌किशोर और वह व्यक्ति साथ साथ जंगल पार करते हुए अंतिम लक्ष्य पर पहुंचे । वहा पर ‌‌‌किशोर के गुरू मोजूद थे ।

जिन्होने ‌‌‌किशोर की हिम्मत को देख लिया ‌‌‌जिसके कारण से सभी बच्चो के सामने ‌‌‌किशोर की बहादूरी की दाद देने लगे । और फिर इस परिक्षा का विजय ‌‌‌किशोर ही रहा था । जब बच्चो ने पूछा की गुरूदेव यह तो सबसे अंत में आया था तो यह कैसे विजय हुआ । तब साधू ने सारी योजना बच्चो को बता दी ।

जिसके कारण से बच्चे भी समझ गए की ‌‌‌किशोर ने बहादूरी से काम लिया ‌‌‌और अपनी जान की परवाह नही की थी । जिसके कारण से ही आज साधू ‌‌‌इसकी ‌‌‌शाबासी दे रहे है । यह बच्चो को जरा भी बूरा नही लगा था । कुछ समय बिज जाने पर उन सभी बच्चो के परिक्षा परिणाम भी आ गए थे ।

जिसकी घोषणा पूरे गाव के सामने होनी थी । ‌‌‌और इस घोषणा में भी साधू ने ‌‌‌किशोर की सभी के सामने दाद दी

क्योकी ‌‌‌किशोर भी इस घोषणा ‌‌‌का प्रमुख हिस्सा था । क्योकी वह परिक्षा परिणाम में सर्वतम विजय हुआ था क्योकी उसे अच्छे अंक प्राप्त हुए थे और वह प्रथम आया था  । इस तरह से ‌‌‌किशोर के बारे में फिर सभी अच्छा अच्छा बोलने लगे थे । ‌‌‌इस तरह से साधू के दाद देने का नतिजा यह होता था की ‌‌‌किशोर और ‌‌‌किशोर जैसे अन्य बच्चो ‌‌‌को जीवन भर बहादूर और अच्छा ज्ञानी माना जाता था । इस तरह से साधू के ज्ञान और उसकी परिक्षा हुआ करती थी ।

‌‌‌दाद देना मुहावरे पर निबंध

साथियो अक्सर मानव अपने जीवन में मुहावरो का प्रयोग करता है यह सभी को मालूम है । मगर यहां पर यह जरूर पता होना चाहिए की जीस मुहावरे का प्रयोग किया जा रहा है वह क्या सत्य में यहा पर प्रयोग किया जा सकता है । ‌‌‌जी हां दोस्तो एक मुहावरे के लिए यह जरूरी होता है की उसे सटिक स्थान पर प्रयोग में लाया जाए । और यह केवल तभी होता है जब उस मुहावरे के  अर्थ के बारे में पता होता है ।

और इसी तरह से हमारा मुहावरा दाद देना है । जिसके अर्थ को समझाने के लिए हमने एक कहानी आपको बताई है । दोस्तो इस मुहावरे का अर्थ ‌‌‌शाबासी देना होता है । क्योकी जब परिक्षा परिणाम अच्छे होते है तो शिक्षक कहता है की शाबास । और इसी शब्द के स्थान पर कहानी में साधू ने दाद देना शब्द का प्रयोग किया है । जिसका मतलब हुआ की दाद देना मुहावरे का अर्थ शाबासी देना ‌‌‌साथ भी वाह वाह करना भी हो सकता है । क्योकी जहां पर शाबासी दी जाती है वहां पर वाह वाह जरूर होती है ।

दाद देना मुहावरे पर कहानी

‌‌‌दोस्तो इस तरह से कहा जा सकता है की जहां पर शाबासी देने की बात होती है वही पर इस मुहावरे का प्रयोग होता है । जैसे हमने अनेक तरह के वाक्य में प्रयोग के बारे मे आपको बताया है और जहां जहा पर साबासी देने की बात हुई है  वही पर इस मुहावरे का प्रयोग हुआ है ।

‌‌‌इस तरह से हम कह सकते है की आपके लिए यह समझना बिल्कुल भी कठिन नही होगा की दाद देना मुहावरे का अर्थ क्या होता है ।

very very most important hindi muhavare

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Mohammad Javed Khan

‌‌‌मेरा नाम ‌‌‌ मोहम्मद जावेद खान है । और मैं हिंदी का अध्यापक हूं । मुझे हिंदी लिखना और पढ़ना बहुत अधिक पसंद है। यह ब्लॉग मैंने बनाया है। जिसके उपर मैं हिंदी मुहावरे की जानकारी को शैयर करता हूं।