क से शुरु होने वाले मुहावरे k se shuru hone vaale muhavare की लिस्ट हम यहां पर दे रहे हैं। यदि आपको कोई अ से शुरू होने वाले मुहावरे के बारे मे जानकारी चाहिए तो नीचे देखें।
- कंउध होना -अच्छा और चमकीला होना, पर क्षणिक होना । वाक्य – तुम्हारा सारा ठाटबाट कंउधा है ।
- कंकड़ पत्थर – बेकार की चीजें । वाक्य – इस कंकड पत्थर की यहां आवश्यक्ता नहीं है ।
- कगन बोहना – पजा मिलाना । वाक्य – कगन बोहो तो जोर का पता चले ।
- कघी चोटी – सिंगार पटार । वाक्य – कघी चोटी मे ही रहोगी कि कुछ और काम भी होगा ।
- कघी चोटी करना – श्रृगार पटार करना । वाक्य – कघी चोटी करके मैं आपके साथ घूमने चलूगी ।

- कघी चोटी मे रहना – बनाव चुनाव मे ही रहना । वाक्य – तुम तो दिन रात कघी चोटी मे ही रहती हो, आखिर कुछ घर का काम काज भी होगा या नही ।
- कचन बरसना – बहुत धन प्राप्त होना । वाक्य – आजकल रमेश का क्या पूछना है उसके यहां तो कचन बरस रहा है ।
- कचन का कौर खिलाना – किसी के लिए बहुत खर्च करना । वाक्य – आपको तो वह कचन का कौर खिलाने को तैयार है ।
- कटक होना – बाधा होना । वाक्य – इस काम मे आप क्यो कटक हो रहे है।
- कंठ करना – कठस्थ कर लेना । वाक्य – इस कविता को कंठ कर लो ।
- कंठ का हार होना – बहुत प्रिय होना । वाक्य – आप मेरे कंठ के हार है भला आपको मैं कैसे भूल सकता हूं ।
- कंठ खुलना – आवाज निकलना । वाक्य – कंठ भी तो खुले आखिर क्या चहाते हो ।
- कंठ न खुलना – कुछ न बोलना । वाक्य – कमजोरी के कारण मेरा कंछ नही खुल रहा है । जुकाम से मेरा कंठ नही खुलता है ।
- कंठ फूटना – ठीक ठीक शब्द निकलना । वाक्य – बच्चे का अब कंठ फुट रहा है।
- कंठ बैठना – आवाज भारी होना । गले का बैठ जाना । वाक्य – आज मेरा कठं बैठ गया है मै गा नही सकता ।
- कंठ रखना – याद रखना । वाक्य – इस कविता को उस दिन के लिए कठ रक्खो ।
- कंठ सीचना – पानी या किसी भी पेय से गला तर करना । वाक्य – एक मिनट रुको जरा कंठ सीचन लू ।
- कंठ सूखना – गला सूखना । वाक्य – प्यास के मारे कंठ सूख रहा है ।
- कंठी उठाना – कसम खाना । वाक्य – मे अपनी कंठी उठाकर कह रहा हूं मैने चौरी नही की ।
- कंठी छूना – अपनी कंठी की कसम खाना । वाक्य – कंठी छूकर कह रहा हूं मैने यह काम नही किया ।
- कंठी छोडना – सकल्प तोडना । वाक्य – शराब की बोतल देखते ही उसने कंठी छोड दी ।
- कंठी देना – चेला मूंडना । वाक्य – उसने बहुतो को कंठी दी है ।
- कंठी बांधना – चेला बनाना । वाक्य – उन्होने मुझे आज कंठी बांधी है ।
- कंठी लेना – चेला बनना । वाक्य – योग्य आदमी से कठी लेना चाहिए ।
- कडा होना – सूख कर उपले की तरह कडा होना । वाक्य – पूरियां तो कडा हो गई ।
- कंदल गलाना – चांदी और सोने को एक साथ गलाना ।वाक्य – कंदल गलाकर एक हार बना दो ।
- कंधा डाला देना – मदद करने से इन्कार करना । वाक्य – जब कि कधा था लगाना चाहता आह हमने डाल अब कधा दिया ।
- कधा डालना – हिम्मत छोड देना । वाक्य – बहुतो ने इस काम मे कधा डाल दिया, अब आप चले है ।
- कंधा देना – मदद करना । वाक्य – अगर आप इस काम मे कंधा दे दिये होते तो अवश्य मै इसे पूरा कर लेता ।
- कंधा पकड कर चलना – दूसरे के सहारे काम करना । वाक्य – तुम हर काम मे कंधा पकड कर क्यों चलना चहाते हो ।
- कंधा लगना – गाडी के जुए से रगडकर बैल का कंधा छिल जाना । वाक्य – इस बैल का कंधा लगा हुआ है इसे न जोतो ।
- कंधा लगाना – बोझ उठाना । वाक्य – जरा तुम भी अपना कंधा लगा दो ।
- कंधे उचकाना – अनजान बनना । वाक्य – मेरा परिचय सुनकर उसने कंधे उचका दिये ।
- कंधेला डालना – साडी का छोर बाएं कधे पर से ले जाना । वाक्य – वह बहे तो कंधेला डालती रहेगी ।
- कंधे लगाना -बच्चे को उठाना । वाक्य – राजू को कंधे लगा लो चुप हो जायगा ।
- कंधे से कधा कंधा छिलना -बहुत भीड होना । वाक्य – आज मेले मे कंधे से कंधा छिल रहा था ।
- कंधे से कंधा मिलाकर चलना – एक राय होकर करना । वाक्य – जाति की और देश की सेवा लोग कंधे से कंधा मिलाकर करें ।

- कंधो पर उठाना – जिम्मेदारी लेना । वाक्य – पिता की उमर हो जाने के बाद बेटा उनकी जम्मेदारी अपने कंधो पर ले लेता है ।
- कंपकपी चढना- जाडे से ठिठुर जाना । वाक्य – इस ठंडी हवा मे सबको ही कंपकपी चढ रही है ।
- कंपा लगाना – किसी को फंसाने के लिए जाल बिछाना । वाक्य – आज कंपा लगाओ गोश्त खाने को जी चहाता है ।
- कंपास लगाना – किसी को फंसाने के घात मे लगाना । वाक्य – देखो कंपास लगा रहा हूं शायद वह फस जाय ।
- कंपू का बिगडा हुआ – बगावत करने वाला । वाक्य – उस कपू के बिगडे को अपने घर न आने दिया करो ।
- कबल ओढाकर लूटना – मर्ख बना कर रुपया निकालना वाक्य – आप कबल ओढा कर मुझे लूट नही सकते इस तरह जितना मांगिये मैं देने को तैयार हूं ।
- ककडी के चौर को कटारी से मारना – छोटे कसूर पर कठिन दंढ देना । वाक्य – प्राचीन काल मे ककडी के चोर को कटारी से मारा जाता था, इसी से अपराध कम होते थे । ककडी के चोर को कटारी से मारना कहां का अन्याय है ।
- ककडी खीरा करना – कुछ कदर न करना । वाक्य – जब ककडी खीरा करना है तो मुझे अपने यहां बुलाते क्यो हो ।
- कक्कन छोडना -बहुत मारना । वाक्य – आज तो उसने तुम्हारा कक्कन छोडा दिया ।
- क ख गा आरम्भ करना – सधारण ज्ञान या शुरु का ज्ञान । वाक्य – मैं तो अग्रेजी का क ख ग भी नही जानता ।
- कचकच करना – झगडा करना । वाक्य – तुम्हारा हर समय का कचकच करना ठीक नही है ।दिन रात का कच कच करना अच्छा नही लगता ।
- कचर कचर कर खाना – पेट भर खाना । वाक्य – आज तो दावत मे खूब कचर कचर कर खाए होगे ।
- औ से शुरु होन वाले मुहावरे
- ओ से शुरु होने वाले मुहावरे
- ऐ से शुरु होने वाले मुहावरे
- अ से शुरु होने वाले मुहावरे list-2
- ए से शुरु होने वाले मुहावरे list -2
- कचर कूट खाना – खूब खाना । वाक्य – तेल की चीज है, कचर कूट मत खाओ नही तो हैजा हो जायगा ।
- कचर कूट करना – खूब मारना । वाक्य – अगर अधिक बोलेगा तो कचर कूट करने लगूंगा ।
- कचहरो के कुत्ते – कुत्ते की तरह कचहरी आने वालो का मूंह जोहने वाले । वाक्य – ये वकील मुख्तार तो कचहरी के कुत्ते है ।
- कचहरी चडाना – अदालत मे मुकदमा ले जाना । वाक्य – कचहरी चढ भी आप मेरा कुछ नही कर सकते ।
- कचहरी लगना – बहुत से आदमियो का बैठा रहना ।वाक्य – तुम्हारे याहां तो हर वक्त कचहरी लगी रहती है,, मै आउ भी तो कब ।
- कचालू करना – खूब मारना । वाक्य – अगर ज्यादा बोलोगे तो कचालू कर दूगा ।
- कचूमर निकालना – खूब मारना । वाक्य – उसने छोटे से अपराध के लिए लडके का कचूमर निकाल दिया ।
- कचर होना – कचूर की तरह खूब हरा होना । वाक्य – तुम्हारा खेत तो योही कचूर हुआ है, उसमे पानी देने की क्या आवश्यकता है ।
- कच्चा करना – झूठा ठहरना । वाक्य – उसने सारी बातें कच्ची कर दी ।
क से शुरु होने वाले मुहावरे list -1 में आपने कुछ ऐसे मुहावरो के बारे में जाना है जो की पीछले काफी समय से पूछे जा रहे है । अगर आप मुहावरे हमेशा से पढते आ रहे है तो आपको पता होगा की क से बहुत सारे ऐसे मुहावरे है जो की आपने पहले कभी पढे होगे । मगर इसके अलावा जो मुहावरे आपको पढने में कुछ अटपटे लग रहे है आपको उन मुहावरो को याद कर लेना चाहिए । क्योकी वह आप आसानी से भुल जाएगे ।
वैसे क से इस मुहावरो की लिस्ट के अलावा भी हमारी इस वेबसाईट पर अन्य लिस्ट मिलेगी जिसे आप पढ सकते है ।