जिगर के टुकड़े टुकड़े होना मुहावरे का अर्थ jigar ke tukde tukde hona muhavare ka arth – बहुत दुःखी होना ।
दोस्तो अगर आज आपको 2000 हजार का नोट मिल जाता है तो आप काफी खुश हो जाते है । और आप सोचते है की आज तो बड़ा अच्छा दिन है । इस खुशी को आप अपने परिवार के साथ भी बताते है । मगर वही पर जब आपको पैसे मिलते नही है बल्की आपके 2000 रूपय निकल कर पड़ जाते है तो आप अपने खोए गए पैसो के कारण से काफी दुखी रहते हो । और आप इस दुख को दूसरो के सामने भी जाहिर करते हो और कहते हो की आज तो दिन बड़ा बुरा रहा दो हजार रूपय निकल कर पड़ गए है ।
तो दोस्तो इस तरह से जब आप अत्यधिक दूखी हो जाते हो तो इसे जिगर के टुकड़े टुकड़े होना कहा जाता है । और आपको यह बताने की जरूरत नही है की मानव के जीवन में दुख एक तरह के नही होते है । बल्की समय समय पर दुख आते ही रहते है । और इस तरह से जब आप किसी भी कारण से अधिक दुखी हो जाते हो तो वहां पर इस मुहावरे का प्रयोग होता है । और कहा जाता है की जिगर के टूकड़े टूकड़े हो गए ।
class="wp-block-heading">जिगर के टुकड़े टुकड़े होना मुहावरे का वाक्य में प्रयोग
आज तो दो हजार रूपय गुम गए जिसके कारण से जिगर के टुकड़े टुकड़े हो रहे है ।
सरला के बारें में अचानक पता चला की वह बीमार है और अभी हॉस्पिटल में है यह सुन कर जिगर के टुकड़े टुकड़े हो गए ।
जब रामु ने बताया की तुम्हारे पिता के साथ दुर्घटना हो गई है तो यह सुन कर जिगर के टूकड़े टूकड़े हो गए ।
जैसे ही राहुल को पता चला की उसके पिता की मौत हो गई है बिचारे के जिगर के टूकड़े टूकड़े हो गए ।
जब महेश को पता चला की उसके 50 हजार रूपय चोरी हो गए है तो बिचारे के जिगर के टूकड़े टूकड़े हो गए ।
सरपंच साहब की मोत की खबर ने पूरे गाव के लोगो के जिगर के टूकड़े टूकड़े कर दिए ।
जिगर के टूकड़े टूकड़े होना मुहावरे पर कहानी
प्राचीन समय की बात है किसी नगर में एक धनपत राय नामक राजा हुआ करता था । धनपत नाम की तरह की धनवान था और वह अच्छा राजा था । जिसके कारण से हर कोई उसे पसंद करता था । अगर प्रजा की बात की जाए तो धनपत राजा को सभी चाहते थे। और सभी कहते थे की धनपत जैसा राजा कही देखने को नही मिलने वाला है ।
इसके पिछे का कारण यह था की धनपत राजा होने के साथ साथ लोगो के लिए मसिहा की तरह रहता था । जब भी अपनी प्रजा को किसी चिज की जरूरत होती तो उसी समय उनके लिए वह लोकर रख देता था । इस कारण से प्रजा में ऐसा कोई नही था जो की धनपत राजा से नफरत करता था । धनपत राज की केवल एक पत्नी थी जिसका नाम सुररेखा था ।
सुररेखा एक राजा की बेटी थी । और वह जिस राज्य थी वहां पर महल में जो भी महिला होती थी उसे युद्ध के लिए तैयार किया जाता था । क्योकी वहां पर जो राजा था यानि सुररेखा के पिता जो थे उनका मानना था की कभी ऐसा भी समय आ सकता है जब दुश्मन महल पर हमला कर दे तो ऐसी स्थिति में सभी महिलाए अपनी जान बचाने के लिए दुश्मनो का समाना कर सके । और ऐसा केवल वहां का मानना ही नही था बल्की वहां पर ऐसा एक बार हुआ भी था ।
दरसल क्या हुआ था की सुररेखा के जो पिता थे वे किसी कारण से अपने राज्य से बाहर थे । और इसी बात का फायदा उठा कर पड़ोसी राज्य ने वहां पर हमला कर दिया था । मगर उस समय सुररेखा उसी महल में थे । और वहां पर सुररेखा के पति जो की उस समय सुररेखा के पति नही थे । वे सुररेखा के पिताजी से मिलने के लिए आए थे ।
जिसके कारण से वे सुररेखा के पिजाती का इंतजार कर रहे थे । क्योकी राज्य पर हमला हो गया था तो एक राजा का यह कर्तव्य बनता था की अपने साथी राज्य को दुश्मनो से बचाने का प्रयत्न करे । इस कारण से वे तुरंत सभी महल के लोगो को अपने पास बुलाया और सुररेखा को कहा की आप इस राज्य की राजकुमारी हो और इसे आपको ही बचाना होगा ।
क्योकी इस समय आपके पिताजी यहां पर नही है तो आपको ही अपने सेनिको को आदेश देना होगा । और फिर एक योजना के तहत सुररेखा के पति धनपत ने दुश्मनो का सामना करने की योजना बनाई थी । मरग उस समय वहां पर सेना की कमी थी । जिसके कारण से सभी दुश्मनो का सामना तो कर सकते थे मगर कोई दुश्मन महल के आस पास आ जाता है तो उसका सामना नही किया जा सकता था ।
तभी सुररेखा ने कहा की महल की हिफाजत करने की जीम्मेदारी हमारी है । महल की जिम्मेदारी हम सभी महिलाए लेती है । हालाकी इस बात के कारण से धनपत को यह विश्वास नही हुआ था की महिलाए महल को बचा सकती है । क्योकी उसने ऐसा नही देखा था की महिलाए भी युद्ध लड़ सकती है ।
मगर सेना की कमी होने के कारण से धनपत ने सुररेखा की बात मानी और युद्ध के लिए दुश्मनो का सामना करने के लिए चले गए थे । और काफी समय तक युद्ध चलता रहा था । मगर तभी पिछे से दुश्मन महल में आ जाते है । मगर वहां पर उन्होने सुररेखा का समाना किया और वहां पर दुश्मन यह देख कर हैरान थे की महिलाए अपने हाथो में तलवार लेकर युद्ध के लिए तैयार है ।
इतना ही नही उन्होने युद्ध भी किया था और दुश्मनो से अपने महल को बचा लिया था । और उधर धनपत ने दुश्मनो से उस राज्य को बचाने में मदद की थी । जब राजा को इस बारे में पता चला तो तुरंत अगले ही दिन राजा अपने राज्य में आ गया । मगर वहां पर आने के बाद में उसे पता चला की धनपत राजा ने उनके राज्य को बचाने मे काफी योगदान दिया है । और यह सब देख कर धनपत से राजा ने अपनी बेटी का विवाह करने को कहा ।
हालाकी धनपत राजा को इस बात से कैसे एतराज हो सकता था । क्योकी उसकी जीवन साथी एक ऐसी महिला बन रही थी जो की युद्ध कला को काफी बेहतर तरीके से जानती है । और इससे साथ ही सुररेखा काफी खुबसुरत थी । जिसके कारण से धनपत राजा और सुररेखा का विवाह हो गया था ।
विवाह के बाद में कई वर्षों के बाद की बात है । और यही असली कहानी का टॉपीक है । क्योकी दोस्तो आपको पता है की राजा के जीवन में युद्ध एक ऐसी स्थिति है जिसमें राजा को अपने प्राण तक गवाने पड़ जाते है । और ऐसा ही धनपत के साथ हो गया था ।
दरसल धनपत और सुररेखा के विवाह के 27 वर्षों की बात है । तब तक धनपत का एक बेटा भी था । उस समय राज्य पर हमला हुआ था । और हमले से अपने राज्य को बचाना था । तो धनपत चले गए युद्ध करने के लिए । उन्हे पता था की युद्ध को वे जीत सकते है । मगर उन्हे यह पता नही था की कोई ऐसा है जो की पीठ पिछे वार कर सकता है ।
दरसल आपको बता दे की धनपत के रथ को जो चलाने का काम कर रहा था वह असल में दुश्मन का साथी था और उसी ने युद्ध के समय राजा पर हमला कर दिया और राजा मारा गया था । मगर जब सेना ने यह देखा तो कोई भी रूकने का नाम नही ले रहा था और यह सब देख कर धनपत राजा को मारने वाला हक्का बक्का रह गया था ।
और यह देख कर दुश्मन सेना भी हैरान थी । क्योकी आम रूप से राजा के अंत होते ही सेना दुश्मन के सामने हार मान जाया करती थी । मगर दोस्तो इसके पिछे का कारण केवल धनपत राजा ही था । क्योकी धनपत राजा ने अपनी सेना को यह पहले ही कह दिया था की अंतिम समय तक दुश्मनो का सामना करना है और राज्य को दुश्मन से बचाना है ।
चाहे इस बिच में मैं स्वयं ही खत्म क्यो न हो जाउ । मगर तभी कुछ लोग राजा के पास चले गए थे और राजा को चुपके से उठा कर किसी गुप्त स्थान पर लेकर चले गए थे । जिसके बारे में किसी को कुछ पता नही थी । और उधर सेना युद्ध कर रही थी । सेनापति किसी से कम नही था वह सभी को युद्ध करते रहने का आदेश देता रहा और अंत में युद्ध को जीत कर ही माने । इस तरह से धनपत की सेना की विजय हुई थी ।
मगर कुछ ही समय मे धनपत की पत्नी सुररेखा और उसके बेटे के पास एक खबर पहुंची की महाराज युद्ध में मारे गए है । यह खबर सुनते ही सुररेखा और उसके बेटे के जिगर के टूकडे टूकड़े हो गए थे ।
मगर तभी सुररेखा ने विलाप नही किया और अपनी सभी सेना को अपने पास आने का आदेश दिया और कहा की महल को बचाना है अब सभी महल पर हमला कर सकते है । क्योकी दुश्मन सेना ने राजा का अंत कर दिया है । यह सुन कर बाकी सेना के जिगर के टूकड़े टूकड़े हो गए थे ।
और यह खबर जैसे ही प्रजा के पास पहुंची तो वे काफी दुखी हो गए और अपने राजा के लिए विलाप करने लगे थे । तब इतना अधिक शोर हुआ था की राजा की जो भी सेना युद्ध जीस चुकी थी उनके पास पहुंचा । अब आप कहोगे की क्या सच में धनपत की मोत हो गई थी । तो इसका उत्तर है नही । क्योकी जैसे ही धनपत पर वार हुआ था तो पिछे से कुछ लोगो ने उन्हे पकड़ कर सुरक्षित जगह लेकर चेल गए और वहां पर लेजाकर उनके घावो पर दवा लगाई ।
जिसके कारण से राजा की जान बच गई । और जब राजा ने विलाप सुना तो वह स्वयं अपनी सेना को राज्य में जाने का आदेश दे देते है और कहते है की सभी को सुचना दे दो की मैं ठिक हूं । और सेना ने आदेश का पालन किया कुछ लोग चले गए और सभी को जाकर इस बारे में बताने लगे । केवल महल बचा था वहां पर राजा स्वयं और बाकी की सेना जाने लगी थी ।
मगर जैस ही महल में प्रवेश करने के लिए आगे बढे तो राजा धनपत और सभी ने देखा की उनके महल के लोग ही उन पर हमला करने लिए आ रहे थे । मगर जैसे ही सभी ने देखा की यह तो हमारी ही सेना है तो सभी रूक गए । और यह देख कर धनपत राजा हंसने लगा । मगर किसी को इस बारे में समझ में नही आया और न ही राजा ने किसी को बताया ।
जब राजा अपने विश्राम कक्ष में पहुंचे तो वहां पर महारानी यानि सुररेखा भी आ गई । तभी सभी लोग वहां से बाहर चले गए थे । तब राजा ने कहा की अरे महारानी जी आपने तो हम पर हमला करने की योजना बना रखी थी । मगर महारानी ने कहा की आप हो जो की अपना ध्यान नही रख रहे हो आपको कुछ हो जाता तो ।
हम सभी ने जो सुना वह सुन कर हमारे जिगर के टूकड़े टूकड़े हो गए है । मगर राजा ने कहा की आपके होते हुए हमको क्या होगा । इस तरह से राजा इस बात को मजाक में लेकर दुखो को दूर कर देते है ।
और तभी प्रजा महल के बाहर आती है । तब महारानी बाहर जाती है और सभी को कहती है की राजा साहब पूरी तरह से ठिक है जैसे ही ठिक होते है आपके पास आकर मिलते है । यह सुन कर सभी दुख को भुल जाते है और खुश होकर वहां से चले जाते है ।
इस तरह से दोस्तो राजा पर वार होने के कारण से भी के जिगर के टूकड़े टूकड़े होते है ।
इस तरह से दोस्तो आपको यह समझ मे आ गया होगा की इस मुहावरे का अर्थ बहुत दुखी होना होता है । क्योकी जब सभी को बहुत दुख होता है तब तब इस मुहावरे का कहानी में प्रयोग किया गया था ।
मेरा नाम मोहम्मद जावेद खान है । और मैं हिंदी का अध्यापक हूं । मुझे हिंदी लिखना और पढ़ना बहुत अधिक पसंद है। यह ब्लॉग मैंने बनाया है। जिसके उपर मैं हिंदी मुहावरे की जानकारी को शैयर करता हूं।